Thursday , 16 August 2018

योगी सरकार के खिलाफ ‘जेपी आंदोलन’ की जरूरत : रामगोविन्द चौधरी

लखनऊ, 12 अगस्त (उदयपुर किरण). लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र संघर्ष मोर्चा ने रविवार को हजरतगंज स्थित महात्मा गांधी पार्क में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया. छात्रों ने लखनऊ विवि कुलपति के इस्तीफा सहित फर्जी मुकदमों में फंसाये गये छात्रों के न्याय की मांग की. छात्रों के प्रदर्शन को सपा, कम्युनिस्ट पार्टी, राजद समेत अन्य पार्टियों ने भी समर्थन किया है.

इस दौरान नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने प्रदेश के छात्रों का आह्वान करते हुए योगी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि तानाशाही सरकार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिये 1974 जैसे जेपी आन्दोलन की जरुरत है. कहा कि लखनऊ विवि के प्रवेश प्रक्रिया से छात्रों को वंचित किया जाना, कुलपति की संघी विचारधारा को प्रदर्शित करता है.

चौधरी ने योगी सरकार पर छात्र विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार समाजवादी मानसिकता के छात्रों की आवाज कुचलना चाहती है. सेमिनार व प्रदर्शन आदि पर रोक लगाना लोकतंत्र का गला घोटने जैसा है. इनको संविधान पर विश्वास नहीं है. भाजपा व सरकार के सभी नारे गलत हैं. ये लोग ‘न बेटी को पढ़ा रहे हैं और न ही बचा पा रहे हैं.’ वहीं ‘सबका साथ-सबका विकास’ का नारा जनता के साथ मजाक है. ये सभी लुभावने नारे हैं.

मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष करुणेश द्विवेदी ने कहा कि विवि प्रशासन पिछले कई महीनों से लगातार छात्रों पर अत्याचार कर रहा है. छात्रों को दाखिला न देने के बजाय उनके विरूद्ध गलत तरीके से एफआईआर दर्ज करवाकर जेल भेजा जा रहा है. छात्रों ने कुलपति को बर्खास्त करने की मांग की.

उन्होंने बताया कि प्रशासन ने विद्यार्थियों की प्रवेश परीक्षा आयोजित कर लिया, लेकिन परिणाम घोषित नहीं किया. जब प्रवेश परिणाम घोषित करने की मांग को लेकर छात्र-छात्राओं ने आंदोलन किया तो योगी सरकार व विश्वविद्यालय प्रशासन के इशारों पर छात्र नेताओं पर पुलिसिया दमन किया गया. छात्रों को 307 जैसी फर्जी मुकदमा में फंसाया है.

योगी सरकार के इशारे पर सेमिनार हाल में जाने से रोका

छात्र संघर्ष मोर्चा के नेताओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि रविवार को राजनैतिक दलों का सम्मेलन ‘गंगा प्रसाद मेमोरियल हॉल’ में होना था. लेकिन योगी सरकार के इशारे पर हाल की अनु​मति को रद्द कर दिया गया. छात्र नेताओं ने कहा कि सेमिनार पर रोक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है. इस वाकया से साफ हो गया है कि सरकार छात्रों के आंदोलन के सामने घुटने टेक चुकी है. इस मामले में जिला प्रशासन ने बताया कि सेमिनार न हो, इसको लेकर सरकार ने आदेश दिया है.

Report By Udaipur Kiran

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